गुरुवार, 26 अगस्त 2010

भाई साहब दिल्ली डूब रही है

राहुल यादव

भाई साहब दिल्ली बचेगी नहीं इस बार। पुरानी दिल्ली। नई दिल्ली। हमारे पुरखों की दिल्ली। यमुना किनारे बसी दिल्ली। मीडिया का हब बनी दिल्ली। नहीं बच पाएगी। यमुना में उफान है। खतरे के निशान से ऊपर बह रही है यमुना। पूरी दिल्ली डूब जाएगी। शायद कोई न बचे। सब के घरों में पानी घुस गया है। जानवर की छोड़ो इंसान को भी ठौर नहीं है दिल्ली में। यमुना खुद के किनारे तोड़ सड़कों पर आ गई है। घुटनों घुटनों पानी पानी हो गई है दिल्ली। यमुना सबको डूबो देगी। भयंकर बाड़ के आसार हैं। प्रशासन सोया है। भाई साहब दिल्ली बचेगी नहीं। इस बार।

इक्कीस इंच की टीवी पर बवाल मचा है। किसी किसी की ग्यारह और किसी की इक्कीस से भी अधिक इंच वाली टीवी पर। दिल्ली डूब जाएगी। पूरी दुनिया में खबर है। सबको पता है। दिखाई दे रहा है। महज दिल्ली वालों को छोड़कर। अब तक उन्हें डूबने का अहसास नहीं है। बांगडू। स्याले। पूरी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चीख रही है। लेकिन यह हैं कि रोज की तरह ऑफिस जा रहे हैं। बड़े बड़े मॉल में खरीदारी कर हैं। बाजारों की रौनक बने हंै। मल्टीप्लेक्स में मनोरंजन कर रहे हैं। होटल में पिज्जा, बर्गर और चाउमीन उड़ा रहे हैं। डूबने का अहसास भी नहीं है। पार्कांे में गलबहियां हो रही हैं। बदमाशों की लूटपाट जारी है। दूसरे शहरों में रहने वाले रिश्तेदार मीडिया की मानकर खैरियत पूछने में जुट गए हंै। लेकिन दिल्ली वाले हैं कि सड़कों पर टहलने और सैर सपाटे से फुर्सत ही नहीं। बताते ही नहीं कि दिल्ली कहां डूब रही है। कितने गैर जिम्मेदार हैं। जिम्मेदार मीडिया की भी नहीं सुनते। डूब जाएंगे स्याले। तब समझेंगे। क्यों चीख रही थी मीडिया। समझा रही थी मीडिया।

कितनी बड़ी है इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की इक्कीस इंची टीवी। जिसमें सैंकड़ों किलोमीटर की दिल्ली डूब गई है। हजारों किलोमीटर की यमुना में भयंकर उफान है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम पर अरबों का घोटाला हो रहा है। संसद में महंगाई और सांसदों की तनख्वाह पर हंगामा मचा है। अधिग्रहण पर लाखों किसानों ने दिल्ली में डेरा डाल दिया है। संसद का घेराव कर लिया है। चोर चोरी कर रहे हैं। ठगी, जालसाजी और अंडरवल्र्ड के तार दिल्ली में तेजी से फैल रहे हैं। पुलिस सोई है। बदमाश चौकस हैं। फिल्मों की शूटिंग हो रही है। हीरो, हीरोइन प्रमोशन के लिए आ रहे हैं। विदेशी राजदूतों और राज नायकों की आवाजाही जारी है। आईएसआई की नजर दिल्ली पर है। दिल्ली में भिखारी फैल गए हैं। बिहारियों ने कब्जा जमा लिया है। झुग्गी झोपड़ी वालों ने बदसूरत बना दी है दिल्ली। उसी सड़क पर यमुना उफान मार रही है, किसान आंदोलन कर रहे हैं, भिखारी भीख मांग रहे हैं, कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी हो रही है और उसी सड़क पर दिल्ली डूब रही है।

कितनी ठगनी है दिल्ली। पल पल रूप बदल रही है। स्टूडियो में एंकर बदलता है। दिल्ली का रूप बदल जाता है। कभी डूब जाती है। तभी क्राइम सिटी बन जाती है। तो कभी हमेशा की तरह गुलजार होकर पब और मॉल कल्चर में मस्त हो जाती है दिल्ली। नाइट क्लब में थिरकती, वाइन व बीयर के नशे में झूमती। सेक्सी दिल्ली। क्योंकि यह दिल्ली है मेरी जान।

1 टिप्पणी:

राहुल प्रताप सिंह राठौड़ ने कहा…

कुछ चैनलों ने सबको बदनाम कर रखा है ..
मैं तो पहले से इन चैनलों को छोड़ चुका हूँ | सिर्फ BBC Hindi

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